मध्य प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियां 71 हजार करोड़ के घाटे में, जानें देश में राज्य की स्थिति

भोपाल 
मध्य प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। केंद्र सरकार की ताजा रिपोर्ट के अनुसार राज्य की तीनों बिजली वितरण कंपनियों पर मार्च 2025 तक 49 हजार करोड़ से अधिक का कर्ज हैं। वहीं, तीनों को कुल 71,395 करोड़ रुपये का घाटा हो चुका है। इस भारी नुकसान के साथ मध्य प्रदेश देश में बिजली वितरण के मामले में चौथे सबसे अधिक घाटे वाले राज्यों में शामिल हो गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो प्रदेश की बिजली वितरण व्यवस्था पर और अधिक वित्तीय दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। यह जानकारी बिजली राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।  

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एक कंपनी पर सबसे ज्यादा बोझ
राज्य की सबसे बड़ी बिजली वितरण कंपनी मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (एमपीएमकेवीवीसीएल) पर अकेले 30,900 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज है। यह नुकसान कई छोटे राज्यों के कुल घाटे से भी अधिक बताया जा रहा है। वहीं, पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी पर लगभग 27,992 करोड़ रुपये का घाटा है। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को करीब 12,503 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। तीनों कंपनियों का संयुक्त घाटा प्रदेश की बिजली व्यवस्था की कमजोर आर्थिक स्थिति को दर्शाता है।

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देश में कहां है मध्य प्रदेश
राष्ट्रीय स्तर पर डिस्कॉम ने वर्ष 2025 में 2,701 करोड़ रुपए का कर पश्चात मुनाफा दर्ज किया है, लेकिन एमपी समेत कई राज्यों के लिए पुराने कर्ज और घाटे की भरपाई करना चुनौती बना हुआ है। बिजली वितरण कंपनियों के कुल घाटे के मामले में पहले स्थान पर तमिलनाडु है। वहीं, दूसरे नंबर पर उत्तरप्रदेश, तीसरे नंबर पर राजस्थान और चौथे नंबर पर मध्य प्रदेश है। 
 
घाटे के पीछे ये कारण
विशेषज्ञों के अनुसार बिजली कंपनियों के घाटे के मुख्य कारणों में तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान, बिजली दरों में समय पर संशोधन न होना, सरकारी विभागों का बकाया भुगतान और सब्सिडी की देर से भरपाई शामिल हैं। 

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